संघर्ष भी मुस्कान का हिस्सा
एक दिन पति-पत्नी में झगड़ा हो गया। रात के खाने के बाद, पति और बच्चे तो सोने के चले गए, लेकिन पत्नी यह सोचकर घर से बाहर चली गई कि अब वह अपने पति के साथ नहीं रह सकती।
जब वह अपने पड़ोस की गलियों से गुजर रही थी, तो उसने एक घर से आती हुई आवाज सुनी – एक महिला अपने बच्चे के लिए रोटी के लिए भगवान से प्रार्थना कर रही थी।
थोड़ी दूर आगे जाकर उसने एक और महिला को भगवान से प्रार्थना करते सुना कि वह उसके बेटे को हर कठिनाई से बचाए।
दूसरे घर से एक आदमी की आवाज आई जो अपनी पत्नी से कह रहा था कि वह अपने मकान मालिक से कुछ दिन और मोहलत मांग ले तथा हाथ जोड़कर विनती करे कि वह उन्हें रोज रोज किराए के लिए परेशान करना बंद कर दे।
आगे बढ़ने पर उसने एक बुजुर्ग दादी को अपने पोते से यह कहते सुना, “तुम्हें मेरे लिए दवा लाए हुए बहुत दिन हो गए।”
पोते ने रोटी खाते हुए कहा, “दादी, अब तो मेडिकल स्टोर वाला भी उधार देने से मना कर रहा है और मेरे पास आपकी दवा खरीदने के लिए पैसे नहीं हैं।”
थोड़ी दूर आगे जाकर उसने एक और औरत को अपने भूखे बच्चों से कहते सुना, “आज तुम्हारे पापा तुम्हारे लिए खाने को कुछ न कुछ जरूर लाएँगे। तब तक तुम सो जाओ। जब तुम्हारे पापा आएँगे, तो मैं तुम्हें जगा दूँगी।”
पत्नी कुछ देर वहीं खड़ी रही, फिर अपने घर की ओर मुड़ गई, यह सोचते हुए जो लोग हमें खुश और संतुष्ट लगते हैं, उनके भी अपने छिपे हुए संघर्ष होते हैं।
फिर भी, वे सभी अपना दर्द और दुःख छुपाकर मुस्कराते हुए जीते हैं। वह घर लौटी और अपने घर, अपने बच्चों और एक अच्छे पति धीरज का धन्यवाद किया। हाँ, कभी-कभी बहस भी होती थी, लेकिन फिर भी धीरज उसकी बहुत परवाह करता था। उसे एहसास हुआ कि हालाँकि उसके हिस्से में भी कई परेशानियाँ थीं, लेकिन दूसरों को तो उनसे भी ज़्यादा मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा था।
अत: हर मुस्कान के पीछे एक संघर्ष छिपा होता है। इसलिए जो आपके पास है उसके लिए भगवान के आभारी रहें, अपने रिश्तों की कद्र करें और जीवन की चुनौतियों को धैर्य के साथ स्वीकार करें। यही “जीवन की सच्चाई” है।
जय श्रीराम