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Year Archives: 2024

Stories

श्रद्धा न बदले-मैं काल हु

श्रद्धा न बदले-मैं काल हु भगवान कहते हैं भक्त को अपने नियम और श्रद्धा नही बदलनी चाहिए, भले ही उस पर कितने ही कष्ट आये। मैं तुम्हारे सारे कार्य समय आने पर सिद्ध कर दूंगा। एक व्यक्ति सुबह सवेरे उठा...

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सुविचार-सुन्दरकाण्ड-151

जय श्री राधे कृष्ण ……. "तब मधुबन भीतर सब आए, अंगद संमत मधु फल खाए, रखवारे जब बरजन लागे, मुष्टि प्रहार हनत सब भागे ।। भावार्थ:- तब सब लोग मधुवन के भीतर आए और अंगद की सम्मति से सबने मधुर...

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लोकतंत्र के महापर्व

लोकतंत्र के महापर्व एक छात्रावास में 100 छात्र रहते थे। नाश्ते में रोज़ उपमा मिलता था, 80% छात्रों को कंप्लेन रहती थी कि रोज रोज एक ही चीज़ से ऊब चुके हैं, 20% छात्र कुछ नहीं कहते थे, उपमा में...

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सुविचार-सुन्दरकाण्ड-150

जय श्री राधे कृष्ण ……. "मिले सकल अति भए सुखारी, तलफत मीन पाव जिमि बारी, चले हरषि रघुनायक पासा, पूँछत कहत नवल इतिहासा ।। भावार्थ:- सब हनुमान जी से मिले और बहुत ही सुखी हुए, जैसे तड़पती हुई मछली को...

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राममय भारत

राममय भारत आज भारतीय सभ्यता ने अपने पुनरुत्थान और प्रस्थान के लिए जिस चरित्र को चुना, वह राम हैं। ऐसा नहीं कि राम से पहले भारत में महापुरुष नहीं हुए। अनेक हुए। लेकिन राम एक प्रतिमान बन गए। मर्यादा, त्याग,...

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सुविचार-सुन्दरकाण्ड-149

जय श्री राधे कृष्ण ……. "हरसे सब बिलोकि हनुमाना, नूतन जन्म कपिन्ह तब जाना, मुख प्रसन्न तन तेज बिराजा, कीन्हेसि रामचंद्र कर काजा ।। भावार्थ:- हनुमान जी को देख कर सब हर्षित हो गए और तब वानरों ने अपना नया...

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महादेव का वरदान- गजासुर

महादेव का वरदान- गजासुर गज और असुर के संयोग से एक असुर का जन्म हुआ. उसका मुख गज जैसा होने के कारण उसे गजासुर कहा जाने लगा। गजासुर शिवजी का बड़ा भक्त था और शिवजी के बिना अपनी कल्पना ही...

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सुविचार-सुन्दरकाण्ड-148

जय श्री राधे कृष्ण ……. "चलत महाधुनि गर्जेसि भारी, गर्भ स्रवहिं सुनि निसिचर नारी, नाघि सिंन्धु एहि पारहि आवा, सबद किलकिला कपिन्ह सुनावा ।। भावार्थ:- चलते समय उन्होंने महाध्वनि से भारी गर्जना किया, जिसे सुन कर राक्षसों की स्त्रियों के...

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समस्या

समस्या एक राजा ने बहुत ही सुंदर ''महल'' बनावाया और महल के मुख्य द्वार पर एक ''गणित का सूत्र'' लिखवाया... और एक घोषणा की कि, इस सूत्र से यह 'द्वार खुल जाएगा, और जो भी इस ''सूत्र'' को ''हल'' कर...

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सुविचार-सुन्दरकाण्ड-147

जय श्री राधे कृष्ण ……. "जनक सुतहि समुझाइ करि बहु बिधि धीरजु दीन्ह, चरन कमल सिरु नाइ कपि गवनु राम पहिं कीन्ह ।। भावार्थ:- हनुमान जी ने जानकी जी को समझा कर बहुत प्रकार से धीरज दिया और उनके चरण...

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