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Year Archives: 2024

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अच्छे और बुरे लोगों की पहचान

अच्छे और बुरे लोगों की पहचान बहुत समय पहले की बात है। नदी के तट पर एक गांव बसा था और उसी के नजदीक एक संत का आश्रम था। एक बार संत अपने शिष्यों के साथ नदी में स्नान कर...

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सुविचार-सुन्दरकाण्ड-155

जय श्री राधे कृष्ण ……. "राम कपिन्ह जब आवत देखा, किएँ काजु मन हरष बिसेषा, फटिक सिला बैठे द्वौ भाई, परे सकल कपि चरनन्हि जाई ।। भावार्थ:- श्री राम जी ने जब वानरों को कार्य किए हुए आते देखा तब...

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जय हनुमंत संत हितकारी

जय हनुमंत संत हितकारी दूसरों की संकट की घड़ी में संकट निवारक बन उनके संकटों को अपना संकट मानकर उसके निवारण के लिए प्राणों तक को दाँव पर लगा देना। श्री हनुमान जी महाराज का जीवन हमें सीख देता है।...

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सुविचार-सुन्दरकाण्ड-154

जय श्री राधे कृष्ण ……. "नाथ काजु कीन्हेउ हनुमाना, राखे सकल कपिन्ह के प्राना, सुनि सुग्रीव बहुरि तेहि मिलेऊ, कपिन्ह सहित रघुपति पहिं चलेऊ ।। भावार्थ:- हे नाथ! हनुमान ने ही सब कार्य किया और सब वानरों के प्राण बचा...

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भगवान से क्या मांगें

भगवान से क्या मांगें क्या भगवान हमारे गुलाम हैं? क्या भगवान हमारे सस्ते सौदे के लिए बैठे हैं? हम सभी दिन-रात भगवान से मांगने में ही लगे रहते हैं। हमारी कुछ इच्छा पूरी हो जाती है और कुछ रह जाती...

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सुविचार-सुन्दरकाण्ड-154

जय श्री राधे कृष्ण ……. "आइ सबन्हि नावा पद सीसा, मिलेउ सबन्हि अति प्रेम कपीसा, पूँछी कुसल कुसल पद देखी, राम कृपाँ भा काजु बिसेषी ।। भावार्थ:- सबने आ कर सुग्रीव के चरणों में सिर नवाया । कपिराज सुग्रीव सभी...

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कहाँ और कितना खटखटना है

कहाँ और कितना खटकटना है एक विशाल जहाज का इंजन खराब हो गया। लाख कोशिशों के बावजूद कोई इंजीनियर उसे ठीक नहीं कर सका। फिर किसी ने एक मैकेनिकल इंजीनियर का नाम सुझाया जिसे इस तरह के काम का 30...

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सुविचार-सुन्दरकाण्ड-153

जय श्री राधे कृष्ण ……. "जौं न होत सीता सुधि पाई, मधुबन के फल सकहिं कि खाई, एहि बिधि मन विचार कर राजा, आइ गए कपि सहित समाजा ।। भावार्थ:- यदि सीता जी की खबर न पायी होती तो क्या...

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सेवा का सौभाग्य

सेवा का सौभाग्य यदि जीवन में सेवा का सौभाग्य मिलता हो तो सेवा सभी की करना लेकिन आशा किसी से भी ना रखना क्योंकि सेवा का वास्तविक मूल्य भगवान ही दे सकते हैं इंसान नहीं। जगत से अपेक्षा रखकर कोई...

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सुविचार-सुन्दरकाण्ड-152

जय श्री राधे कृष्ण ……. "जाइ पुकारे ते सब बन उजार जुबराज, सुनि सुग्रीव हरष कपि करि आए प्रभु काज !! भावार्थ:- उन सब ने जा कर पुकारा कि युवराज अंगद वन उजाड़ रहे हैं । यह सुन कर सुग्रीव...

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