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सुविचार-सुन्दरकाण्ड-316

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जय श्री राधे कृष्ण …..

मैं पुनि उर धरि प्रभु प्रभुताई, करिहउँ बल अनुमान सहाई, एहिं बिधि नाथ पयोधि बँधाइअ, जेहिं यह सुजसु लोक तिहुँ गाइअ ।।

भावार्थ:– मैं भी प्रभु की प्रभुता को हृदय में धारण कर अपने बल के अनुसार (जहाँ तक मुझसे बन पड़ेगा) सहायता करूँगा । हे नाथ! इस प्रकार समुद्र को बँधाइये, जिससे तीनों लोको में आपका सुंदर यश गाया जाए…….!!

“नवरात्रि की हार्दिक शुभकामनाएँ! 🙏
माँ दुर्गा आपको शक्ति, साहस, और समृद्धि प्रदान करें। इस उत्सव के दौरान आपकी सभी मनोकामनाएँ पूर्ण हों और आप नई उपलब्धियाँ हासिल करें।”.

सुप्रभात

आज का दिन प्रसन्नता से परिपूर्ण हो..

Lalit Tripathi
the authorLalit Tripathi
सामान्य (ऑर्डिनरी) इंसान की असमान्य (एक्स्ट्रा ऑर्डिनरी) इंसान बनने की यात्रा

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