जय श्री राधे कृष्ण …..
“मकर उरग झष गन अकुलाने, जरत जंतु जलनिधि जब जाने, कनक थार भरि मनि गन नाना, बिप्र रूप आयउ तजि माना ।।
भावार्थ:– मगर, सौंप तथा मछलियों के समूह व्याकुल हो गए। जब समुद्र ने जीवों को जलते जाना, तब सोने के थाल में अनेक मणियों (रत्नों) को भर कर अभिमान छोड़ कर वह ब्राह्मण के रूप में आया….!!
सुप्रभात
आज का दिन प्रसन्नता से परिपूर्ण हो..