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सुविचार-सुन्दरकाण्ड-262

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जय श्री राधे कृष्ण …..

अस प्रभु छाड़ि भजहिं जे आना, ते नर पसु बिनु पूंछ बिषाना, निज जन जानि ताहि अपनावा, प्रभु सुभाव कपि कुल मन भावा ।।

भावार्थ:– ऐसे परम कृपालु प्रभु को छोड़ कर जो मनुष्य दूसरे को भजते हैं, वह बिना सींग – पूंछ के पशु हैं। अपना सेवक जान कर विभीषण को श्री राम जी ने अपना लिया । प्रभु का स्वभाव वानर कुल के मन को (बहुत) भाया….!

सुप्रभात

आज का दिन प्रसन्नता से परिपूर्ण हो..

Lalit Tripathi
the authorLalit Tripathi
सामान्य (ऑर्डिनरी) इंसान की असमान्य (एक्स्ट्रा ऑर्डिनरी) इंसान बनने की यात्रा

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