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सुविचार-सुन्दरकाण्ड-134

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जय श्री राधे कृष्ण …….

बचन सुनत कपि मन मुसुकाना,भाई सहाय सारद मैं जाना, जातुधान सुनि रावन बचना, लागे रचैं मूढ़ सोइ रचना ।।

भावार्थ:- यह वचन सुनते ही हनुमान जी मन में मुस्कराये (और मन-ही-मन बोले कि) मैं जान गया, सरस्वती जी (इसे ऐसी बुध्दि देने में) सहायक हुई हैं । रावण के वचन सुन कर मूर्ख राक्षस वही (पूंछ मे आग लगाने की) तैयारी करने लगे…… ।।

सुप्रभात

आज का दिन प्रसन्नता से परिपूर्ण हो..

Lalit Tripathi
the authorLalit Tripathi
सामान्य (ऑर्डिनरी) इंसान की असमान्य (एक्स्ट्रा ऑर्डिनरी) इंसान बनने की यात्रा

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