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Quotes

सुविचार-सुन्दरकाण्ड-53

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जय श्री राधे कृष्ण …….

सीता तैं मम कृत अपमाना, कटिहउँ तव सिर कठिन कृपाना, नाहिं त सपदि मानु मम बानी, सुमुखि होति न त जीवन हानी…..!!

भावार्थ:- सीता! तूने मेरा अपमान किया है। मैं तेरा सिर इस कठोर कृपाण से काट डालूँगा। नहीं तो (अब भी) जल्दी मेरी बात मान ले। हे सुमुखि! नहीं तो जीवन से हाथ धोना पड़ेगा……!!

सुप्रभात

आज का दिन प्रसन्नता से परिपूर्ण हो..

Lalit Tripathi
the authorLalit Tripathi
सामान्य (ऑर्डिनरी) इंसान की असमान्य (एक्स्ट्रा ऑर्डिनरी) इंसान बनने की यात्रा

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